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कौन थे संत गाडगे? जो 23 फरवरी को व्हाट्सएप के मैसेज और सोशल नेटवर्क पर छाये रहे।

23 फरवरी को व्हाट्सएप के कई मैसेज गाडगे महाराज के जन्मदिन की बधाई दे रहे थे पर संत गाडगे जी थे कौन? और बचपन से अभी तक इनका नाम हमने क्यों नहीं सुना?? हम उत्तरी भारत के हिन्दी भाषी लोग कुछ चुनिन्दा संतों और समाज सुधारकों के बारे में में ही जानते हैं वो भी इसलिए कि वो हमारे पाठ्यक्रम का हिस्सा थे। जैसे कि गुरू नानक देव जी, रैदास, मीरा, सूरदास, कबीरदास और तुलसीदास आदि पर दक्षिण भारत, पश्चिम भारत या भारत के अन्य भागों में हुये संतों और समाज सुधारकों के बारे में ज्यादा नहीं पता क्योंकि हमारी पुस्तकों में उनका जिक्र नही था।

पर आज की इंटरनेट सूचना क्रान्ति और इंस्टेंट मैसेजिंग के ज़माने में हमें भारत के अन्य भागों में हुये संतों और समाज सुधारकों के बारे में जाने-अनजाने व्हाट्सएप ग्रुप से पता चल रहा है फिर जिज्ञासावश हम गूगल सर्च या विकिपीडिया से पढ़कर अपनी नाॅलेज़ को वैलिडेट और अपडेट करते हैं।

संत गाडगे बाबा का जन्म 23 फरवरी, 1876 में अमरावती, महाराष्ट्र में हुआ था। बाबा गाडगे का पूरा नाम देवीदास डेबूजी झिंगराजी जाड़ोकर था। बाबा गाडगे संत कबीर और रैदास की परंपरा में आते हैं। उनकी शिक्षाओं को देखकर ऐसा लगता है कि वे कबीर और रैदास से बहुत प्रभावित थे। यह संयोग ही है कि संत रैदास और गाडगे बाबा की जयंती एक ही महीने (यानि फरवरी) में पड़ती है। घर में उनके माता-पिता उन्हें प्यार से ‘डेबू जी’ कहते थे। डेबू जी हमेशा अपने साथ मिट्टी के मटके जैसा एक पात्र रखते थे। इसी में वे खाना भी खाते और पानी भी पीते थे। महाराष्ट्र में मटके के टुकड़े को गाडगा कहते हैं। इसी कारण कुछ लोग उन्हें गाडगे महाराज तो कुछ लोग गाडगे बाबा कहने लगे और बाद में वे संत गाडगे के नाम से प्रसिद्ध हो गये।

समाज सुधारक संत गाडगे बाबा (जिनका जन्मदिन बीती 23 फरवरी को था)

गाडगे बाबा डा. अम्बेडकर के समकालीन थे तथा उनसे उम्र में पन्द्रह साल बड़े थे। वैसे तो गाडगे बाबा बहुत से राजनीतिज्ञों से मिलते-जुलते रहते थे। लेकिन वे डा. आंबेडकर के कार्यों से अत्यधिक प्रभावित थे। इसका कारण था जो समाज सुधार सम्बन्धी कार्य वे अपने कीर्तन के माध्यम से लोगों को उपदेश देकर कर रहे थे, वही कार्य डा. आंबेडकर राजनीति के माध्यम से कर रहे थे। गाडगे बाबा के कार्यों की ही देन थी कि जहाँ डा. आंबेडकर तथाकथित साधु-संतों से दूर ही रहते थे, वहीं गाडगे बाबा का सम्मान करते थे। वे गाडगे बाबा से समय-समय पर मिलते रहते थे तथा समाज-सुधार सम्बन्धी मुद्दों पर उनसे सलाह-मशविरा भी करते थे।

संत गाडगे महाराज और डा. आंबेडकर

चित्र सौजन्य: बेकरी प्रसाद आजाद |

से @bakeryprasad_azaad

जीवन कथा सौजन्य: विकिपीडिया

और विस्तृत जानकारी के लिए विकिपीडिया का यह

पढ़ें।

 
 
 

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