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चन्दौसी में था कॉमिक्सों का एक खज़ाना।

  • Writer: vision5design
    vision5design
  • Jun 4, 2020
  • 2 min read

Updated: Jun 5, 2020

हाँ, चन्दौसी में वास्तव में कॉमिक्सों का एक खज़ाना था जिसका नाम था विजय बुक सेन्टर।

Vijay Bhaiya listening to songs sitting on green counter.
विजय भईया अपने ग्रीन काउंटर पर बैठे गानों का आनन्द लेते हुये।

बाँके बिहारी जी के मन्दिर से कैथल गेट की ओर थोड़ी दूर जाते हुयें सीधे हाथ पर पड़ता था विजय बुक सेन्टर।

Vijay Book Centre of Chandausi was treasure of comics.
कॉमिक्सों का खज़ाना था विजय बुक सेन्टर।

बाहर खड़़े इस बोर्ड से नाम पता चलता था वर्ना दुकान तो चिक की तरह टँगी कॉमिक्सों से लगभग ढकी सी रहती थी। पतले-संकरे मुख वाली यह दुकान, अन्दर से सपाट लम्बी थी, और गाडे हरे रंग से पुता काउंटर इसे इंगलिश लुक देता था। बच्चों के हिसाब से दुकान ऊँची कही जायेगी क्योंकि मेन प्लेटफार्म पर पहुँचने के लिए सीमेंट से बनी दो पौड़ी की सीढियां थीं। यहाँ विभिन्न प्रकार की काॅमिक्स उपलब्ध रहतीं थीं। लोग खरीदने से ज्यादा किराये पर पढ़ना पसंद करते थे। 25 पैसे रेग्युलर काॅमिक्स और डायजेस्ट वर्ज़न के 50 पैसे। कुछ लोग जो घर पर ले जाके पढ़ना चाहते थे उन्हें काॅमिक्स के मूल्य बराबर सिक्योरिटी ज़मा करानी पड़ती थी। पर ऐसा कम लोग ही करते थे क्यों कि इतने पैसे ज़मा करना अधिकतर बच्चों के पाॅकेट मनी के बजट से बहार होता था साथ ही घरवालों की डांट पड़ने का अन्देशा रहता था। तो यहीं शांति से बैठकर पढ़ना सुरक्षित होता था। साथ ही कैसेट डैक पर बजते मध्यम गानों का लुत्फ़ उठाने का अपना अलग अनुभव था।


लंबा ग्रीन काउंटर और सूखते कपडों की तरह टंगी कॉमिक्स।

यह पीरियड रहा होगा 1985 से 1990 के बीच का जो न केवल चन्दौसी बल्कि भारत और विश्व भर में कॉमिक्स का गोल्डन पीरियड कहा जाता है।

Different types of Hindi comics.
विभिन्न हिन्दी कॉमिक्स

यह ज़माना था डायमण्ड कॉमिक्स, मनोज कॉमिक्स, इंद्रजाल काॅमिक्स, अमर चित्रकथा, लोटपोट, मधुमुस्कान, टिंकल आदि का।

इस दौर में कई नये भारतीय कॉमिक्स ब्रॉण्ड लांच हुये जैसे, राज कॉमिक्स साथ ही विदेशी काॅमिक्स भी हिन्दी भाषा में अनुवादित होकर प्रकाशित हो रही थीं।

पेरेन्टस को खैर यह टाइम वेस्ट लगता था फिर भी उन्हे अमर चित्र कथा और टिंकल से कोई परेशानी नहीं होती थी।

अमरीकी काॅमिक्स व चरित्रों के अलावा विजय बुक सेन्टर न जाने कहाँ से पर कुछ यूरोपियन काॅमिक्स के हिन्दी वर्ज़न भी लाते थे। जैसे कि एस्ट्रिक्स, लकी ल्यूक

लियोनार्डो आदि जोकि बहुत शानदार आर्टवर्क लिए होतीं थी।

विजय बुक सेन्टर वास्तव में चन्दौसी के बच्चों को जाने अनजाने विश्व के दि वेस्ट काॅमिक्स उपलब्ध करा रहे थे और इस बढ़ी होती जनरेशन को विश्व साहित्य से परिचित करा रहे थे।

आक्सा, गार्थ, मैनड्रैक, फैंटम, सुपरमैन, स्पाइडर-मैन और न जाने क्या-क्या।

आज जब गूगल करके इन चरित्रों और काॅमिक्स के बारे और जाना तो बस आवाक रह गये।

यानि कि 1985 -1990 के समय जब लोगों की जागरूकता शायद सीमित रही हो तब यह टाॅप क्लास

मैटिरियल से हम रोज दो - चार हो रहे थे।

वाह, विजय भईया को थैंक्यू तो बनता है।

इसके अलावा जिस म्यूजिक की बात पहले पैराग्राफ़ में की गयी है आप उस म्यूजिक को नीचे शेयर किये गये गाना डाॅट काॅम के लिंक से सुन सकते हैं। नीचे दी गयी फिल्म अलबम के चित्र पर भी टैप कर आप सीधे गाने सुन सकते हैं।


ALAG ALAG movie songs used to be heard at Vijay Book Centre, Chandausi.
अलग-अलग फिल्म के गाने कई बार बजते सुने थे।

और यह रहा वेब लिंक:

https://gaana.com/album/alag-alag

 
 
 

1 Comment


lalitsagarbfa
Jun 05, 2020

Comics ka Article bahut achcha hai .. 👍👍

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