यादों भरी पुस्तक "चन्दौसी जंक्शन" की समीक्षा।

प्रस्तुत है प्रोफेसर शंकर सहाय और श्रीमती प्रीती सहाय द्वारा लिखित पुस्तक "चन्दौसी जंक्शन" की समीक्षा।
समीक्षक हैं श्रीमती सुमन कंचन जो स्वयं चन्दौसी निवासी रह चुकी हैं।

पुस्तक समीक्षा- "चन्दौसी जंक्शन"
(चन्दौसी की स्मृतियों से भरी पुस्तक)
समीक्षक- श्रीमती सुमन कंचन
प्रोफेसर शंकर सहाय और प्रीती सहाय द्वारा लिखित पुस्तक "चन्दौसी जंक्शन" बीते समय में खुलता एक ऐसा गलियारा है जो आप को एक अलग ही दुनिया में पहुँचा देगा।
एक ऐसा संसार जब इंटरनेट तो नहीं था पर फिर भी लोगों की कनेक्टिवीटी में कोई कमी नहीं थी।
जब संसाधन तो सीमित थे, पर अरमानों और सपनों पर कोई पाबंदी नहीं थी।
जब महिलाओं ने घर से बाहर निकलना शुरू कर दिया था और परिवारों ने देश विदेश की उड़ान भरना।
जब चाटुकारिता अपना सिर उठाने लगी थी पर फिर भी मेहनतकश इंसानों को इज्जत और उन्नति दोनों से नवाज़ा जाता था।
छोटे शहर के पालतू जानवरों से ले कर महानगरों की डबल डेकसृ तक- चन्दौसी जंक्शन की लखु कथाएं 1942 से 1982 के भारत की छवि को उजागर करती हैं।
किताब का मुख्य पृष्ठ आप को आकर्षित करता है और पन्ना पलटने के बाद आप एक अलग ही दुनिया में पहुँच जाते हैं-आज कल की भीड़ भाड़ से परे- एक एसा संसार जहाँ नित नये तकनीकी आविष्कार तो नहीं थे पर फिर भी लोग दिल से एक दूसरे के पास थे।
ये कहानियाँ उस युग की हैं जो हवा के साथ धूमिल हो गया है-यदि मारग्रेट मिशैल के शब्दों में कहें तो "Gone With The Wind."
ये कथाएं हैं दृढ़ता और अटलता की, वीरता और बुद्धिमता की, चपलता और मासूमियत की, विकास और त्रासदी की, और कैसे एक घटना न केवल एक व्यक्ति के जीवन पथ को, बल्कि उसकी आगामी पीढ़ियों की जिंदगियों को भी बदल सकती है।
लेकिन इन सभी कहानियों को एकजुट करने वाला सामान्य धागा प्यार और भावनात्मक बंधन की उपस्थिति है।
कहानियों को बहुत ही सरल भाषा में लिखा गया है। शायद यही वजह है कि यह पुस्तक बच्चों में भी उतनी ही लोकप्रिय है जितनी बड़ों में।
पुस्तक अंग्रेजी में होने के बावजूद सारी कहानियों के शीर्षकों में हिन्दी भाषा के शब्दों का प्रयोग किया गया है- जैसे पुलिया, सुराही, विवाह, परवरिश, पैसा, वापसी, सपने, बंटवारा, नामकरण इत्यादि।
प्रोफेसर शंकर सहाय और प्रीती सहाय द्वारा लिखित इस किताब का प्रकाशन नोशन प्रेस ने किया है और इस में चित्रण 12 वर्षीय अरुषि प्रकाश ने किया है।

यह पुस्तक Amazon, Flipkart, Notion Press के अलावा कई प्रसिद्ध पुस्तक विक्रेताओं जैसे यूनिवर्सल बुकसैलर (लखनऊ), बाहरीसन्स, मिडलैंड्स, वैराइटी बुक स्टोर, ओम बुक शौप (दिल्ली), हारमनी बुक शौप (बनारस), बुक गंगा (पूना), गर्ग बृदसृ (अलाहाबाद), बुकपौईंट (हैदराबाद), रीड औन रैन्ट (जबलपुर), राठी मीडिया सेंटर (जोधपुर) में भी उपलब्ध है।
इस के अलावा, यदि आप लेखकों से संपर्क करना चाहते हों या उन के द्वारा हस्ताक्षर की हुई प्रति पाना चाहते हों तो उन्हें shankarsahay7@gmail.com पर सम्पर्क किया जा सकता है।
यह पुस्तक समीक्षा को पूरा पढ़ने के लिए बहुत बहुत आभार।
चन्दौसी ऑनलाइन डाॅट काॅम
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