चन्दौसी की बचपन की यादें: शंकर सहाय
- vision5design

- Apr 25, 2022
- 7 min read
Updated: Apr 26, 2022
"चन्दौसी जंक्शन" पुस्तक जो कि लघु कथाओं और संस्मरण का एक भावनात्मक संकलन है के लेखक शंकर सहाय जी से एक ख़ास बातचीत।



(नोट: वैसे तो यह पुस्तक शंकर जी व प्रीती जी ने मिलकर साझा तौर पर लिखी है जोकि शंकर सहाय जी की जीवन साथी हैं।)
सर जी, सबसे पहले तो आप "चन्दौसी जंक्शन" पुस्तक के बारे में बताइए।
सब से पहले तो Vision5 Design, अनिल कुमार सागर जी, पुष्पेन्द्र प्रकाश सागर जी और उन की पूरी टीम को अनेकानेक धन्यवाद हमें यह अवसर देने के लिए कि हम अपनी पुस्तक "चन्दौसी जंक्शन" के बारे में कुछ कह पायें।
"चन्दौसी जंक्शन" एक प्रयास है हम दोनों (शंकर सहाय-प्रीती सहाय) के द्वारा किस्से, कहानियों के रूप में आप सब लोगों के समक्ष लाने का, उन बातों, घटनाओं को जिन्हें हम ने अपने मम्मी, पापा से सुना है।
इसको लिखने का विचार कैसे आया?
ये सारी बातें, हमारे साथ हमेशा ही यादों के रूप में रही हैं और हमेशा ही रहेंगी। इस पुस्तक को लिखने की प्रेरणा हमें इसी विचार से मिली कि क्यों ना हम अन्य लोगों को भी इन यादों के बारे में बतायें और उन की प्रतिक्रिया जानें।
यह अभी का प्लान था या वर्षों से मन में चल रहा था पर अभी जाकर पूरा हुआ?
कुछ 4-5 वर्ष पहले हम ने इस बारे में सोचना शुरू किया। परन्तु पिछले वर्ष ये तय किया कि सोचना काफी हो गया, अब इस पर अमल करने का समय आ गया है।
इस पुस्तक के पीछे संस्मरण व कहानियों के अलावा भी कोई जनहित का उद्देश्य है?
सब से बड़ा उद्देश्य यही है कि लोग अपने आप को जानें और समझें। यह सारी कहानियां जिन हालातों पर टिकी हुई हैं, वो हालात हम में से कई लोगों ने या तो देखे होंगे या अपने मम्मी पापा से उन के बारे में सुना होगा। तो यदि हम इन यादों को ताज़ा कर सकते हैं तो क्यों ना और सब भी अपने अपने अनुभव कहानियों के रूप में और लोगों से बाँटें। इसी सन्दर्भ में अपनी लिखी कुछ पंक्तियाँ पड़ना चाहूँगा, जो आज कल के वाटसऐप फौरवरडिंग कल्चर पर मेरी एक प्रतिकिया है:-
"बहुत भेज दिया जो औरों ने लिखा,
स्वच्छता से कुछ अल्फ़ाज़ तुम भी पेपर पर उंडेल दो,
दिल की किताब मेरे सामने खोल दो,
अच्छा बुरा खोटा खरा सब अभी बोल दो ............."
आपने लघुकथाओं की इस पुस्तक का नाम चन्दौसी जंक्शन क्यों रखा? क्या इस शीर्षक से यह रेलवे विभाग की किसी पुस्तिका जैसी जान नहीं पड़ती??
इस किताब के प्रकाशित होने के बाद कई लोगों ने केवल किताब का नाम और मुख पृष्ठ देख कर मुझे बताया कि उन्हें क्या लगता है कि यह किताब कैसी होगी। बंगलूरू के मनुज कंचन का कहना था कि यह किताब कोई क्राइम थ्रिलर जैसी लगती है जब कि दिल्ली के डाक्टर अनुपम प्रकाश ने कहा कि शायद यह सारी कहानियाँ एक दूसरे से उसी तरह जुड़ी हों जैसे एक जंक्शन पर पटरियां जुड़ती हों। असल में यह नाम चुनने की वजह यह है कि मेरे पिताजी चन्दौसी शहर के रहने वाले थे और उन के चन्दौसी छोड़ने के बाद हमारा परिवार दिल्ली में बस गया। तो मैं सदा से ही दिल्ली में पला बड़ा था तो मैं जब साल में एक बार, गर्मियों की छुट्टियों में चन्दौसी जाता था तो मुझे लगता था कि चन्दौसी तो एक गांव है। मैं ने शायद कभी गांव देखा नहीं था। तो एक बार पापा ने समझाया: "Chandausi is a Junction. A village can never have a Junction. Akbarpur is a village which is on the outskirts of Chandausi."
इस के अलावा एक और वजह है यह नाम रखने की- इस किताब की सारी कहानियां कई छोटे बड़े शहरों की पृष्ठ भूमि पर आधारित हैं जैसे बदायूं, सम्भल, मुरादाबाद, पिलखुवा, बरेली, सीतापुर, लखनऊ, आगरा, अलाहाबाद, कानपुर, चम्पारन और कई और शहर, और ये सारे शहर इन कहानियों के द्वारा उसी तरह जुड़े हुए हैं जैसे एक जंक्शन शहरों को जोड़ता है।
लेखन और कार्पोरेट ट्रेनर के रूप में आपको कितना समय हो गया है? इससे पूर्व आप किस श्रेत्र से जुड़े थे? आपके इस सफर की शुरुआत कब और कैसे हुई?? और वर्तमान में आपकी इस श्रेत्र मे क्या गतिविधियां चल रही हैं???
लेखन में मेरी दिलचस्पी काफी पहले से ही थी। जब मैं 16-17 वर्ष का था तो मेरी पहली कविता "Today and Tomorrow" अंग्रेजी के एक अख़बार में छपी थी। उस के बाद लिखा बहुत कुछ पर कहीं छपने के लिए नहीं भेजा। 1999 में जब Raymond, Anand Group के साथ 9 वर्ष के industry experience के बाद मैंने NIFT, Delhi में शिक्षा के क्षेत्र में कदम रखा तब मेरे लिखे लेख, case studies पत्रिकाओं में प्रकाशित होने शुरू हुए और उसी दौरान मुझे कई नामी कम्पनियों के मैनेजरों को corporate training देने का मौका मिला। फिर 2015 में मेरी पहली किताब प्रकाशित हुई और उस के बाद गत वर्ष चन्दौसी जंक्शन आई। बहुत जल्द ही हमारी अगली पुस्तक आप सब के समक्ष आएगी जो विभिन्न क्षेत्रों में कार्य कर रहे कुछ लोगों की कविताओं का संग्रह होगा।
अपने आरम्भिक शिक्षा और बाल्यकाल के बारें में बतायें और उस बचपन के उनुभव में चन्दौसी का क्या योगदान रहा या चन्दौसी ने आपके ऊपर क्या छाप छोड़ी?
मेरी शिक्षा, दीक्षा शुरू से ही दिल्ली में हुई। चन्दौसी और शाहजहांपुर में मेरी ददिहाल और ननिहाल थी तो जैसा कि उस समय का रिवाज था मैं हर गर्मियों की छुट्टियों में इन दो शहरों में जाता था। बाद में मेरे सब से बड़े जीजा जी की posting Chandausi में हो गई- CMO के पद पर। तो वहां पर जा कर अपने भांजे, भाजिओं के साथ खेलना, कूदना, talkies में जा कर पिक्चर्स देखना, रिक्शा जैसी नई चीज़ की सवारी का आनन्द उठाना-यह सब कुछ अविस्मरणीय यादें हैं मेरे बचपन की।
अभी कुछ वर्षो से कोरोना काल सा चल रहा है, इन कठिन वर्षो मे आपके क्या अनुभव रहे हैं? क्या घर के अन्दर रह कर आपकी रचनात्मकता बढ़ी है/घटी है या जीवन में कुछ भी खास नही बदला है।
ऊपर वाले की बहुत कृपा रही है मुझ पर और मेरे समस्त परिवार जनों, भाई, बहन और उन के परिवार जनों पर कि हम ने वह कठिन समय ठीक से पार कर लिया। असल में चन्दौसी जंक्शन लिखने की शुरुआत पिछले वर्ष कोरोना काल के दूसरे और तीसरे चरण में हुई जब हमें लगा कि अपनी सारी आधिकारिक और पारिवारिक जिम्मेदारियों को पूरा करने के अलावा हम क्या कर रहे हैं। Online movies, virtual chess games, whatsapp messages. ज़िन्दगी में इन सब से आगे भी कुछ होना चाहिए जिसे आप अपना रचा हुआ कह कर एक संतुष्टी पा सकें। कोरोना के पहले चरण में दशावतार भजन लिख कर, अपना ब्लौग और यू ट्यूब चैनल शुरू कर के जो रचनातमक कार्य मैं ने शुरू किया था, दूसरे और तीसरे चरण में हम ने उसे आगे बढ़ाया और इस तरह चन्दौसी जंक्शन की उत्पति हुई।
क्या आपदा अवसर में परिवर्तित हुई है या अवसर आपदा में खो से गये हैं?
अवसर और आपदा के विषय में मैं अपनी स्वरचित कविता की कुछ पंक्तियां कहना चाहूँगा
"महफिल में भरा पैमाना बड़ के उठाया जाता है,
अपना टाईम आता नहीं लाया जाता है।
वो और होंगे जिन्हें रहता है समय का इंतजार,
हमारे लिए वख्त को वख्त से पहले बुलाया जाता है।
अपना टाईम आता नहीं लाया जाता है। "
कोरोना पूर्व और कोरोना संग जीवन व समाज में आप क्या कुछ बदलाव महसूस करते हैं? अगर हाँ तो एक या दो बदलावों के बारें में बताइए।
दो बदलाव जो कोरोना काल में सामने आए हैं:-
1. इन्सान को हर स्थिति से जूझने के लिए तैयार रहना चाहिए और
2. अपना दिमाग सकारात्मक चीज़ों की तरफ लगाना चाहिए।
क्या आप राजनीति में रूचि रखते हैं? यदि हाँ तब आप के वर्तमान के राजनीतिक स्वरूप पर क्या विचार हैं?
I am completely apolitical person and am not open to any political or religious discussion.
जीवन के इस पडाव पर आप कैसा महसूस करते हैं?
जीवन के इस पड़ाव पर मैं अपने आप को संतुष्ट और प्रसन्नचित्त पाता हूँ।
अब आगे आपके क्या प्लान हैं?
आने वाले समय में पड़ने, लिखने और काम करने का समय जारी रहेगा।
क्या चन्दौसी अब भी आपकी स्मृतियों में बसता है? - अगर हाँ तो.... -:चन्दौसी की पंसदीदा:- - जगह (एक या दो-तीन जो भी हो क्रम से बतायें) - खाने-पीने की चीज (समोसा, बर्फी या जो भी आयटम पसंद हो, साथ ही दुकान का भी उल्लेख करें)
चन्दौसी की यादें:-
1. अकबरपुर का वह पुश्तैनी बाग जिस के आम खा कर हम सब भाई बहन बड़े हुए।
2. कल्लू हलवाई और मंगलसेन हलवाई की सोन पपड़ी जिस का स्वाद अभी तक मेरे साथ है।
3. अजंता टाकीज जहाँ पर हम ने ना जाने कितनी पिक्चरें देख डालीं।
4. बड़े डाकखाने के पास कोठी राम निवास जहाँ मेरी गर्मियों की छुट्टियां बीतीं।
नये चन्दौसी और बचपन के चन्दौसी में आपको प्रमुखत: क्या फर्क नजर आता है?
क्या कोई ऐसी चीज है जो आप वर्तमान चन्दौसी में वह मिस करते हों??
आज का चन्दौसी मैं ने देखा नहीं है क्योकिं पिछली बार मैं चन्दौसी 30 साल पहले गया था। पर आशा है कि आने वाले कुछ महीनों में एक बार चन्दौसी अवश्य जाऊँ।
टाॅप थ्री
- : आपकी टॉप थ्री लिस्ट :-
- बुक्स (3 हिन्दी, 3 English)
- फिल्म (3 हिन्दी, 3 English)
- व्यक्तित्व (3 National 3 International)
आपको बता दें, यह सेक्शन हमने इन्टरव्यू में इस लिए जोड़ा है ताकि लोग यह जान सकें कि समग्र व्यक्तित्व विकास के लिए स्कूली ज्ञान के अलावा विभिन्न स्त्रोतों से प्रेरित होते रहना चाहिए।
मेरी टाॅप 3 English Books

1- If Tomorrow Comes
2- Triple
3-Jonathan Livingstone Seagull
हिन्दी की मेरी 3 पसंदीदा कहानियाँ

मेरी टाॅप 3 English Films

1- The Green Mile,
2- Raiders of the lost ark
3- Casino Royale
हिन्दी की मेरी 3 पसंदीदा फिल्म

1- बेमिसाल
2- लम्हें
3- विधाता
मेरे कुछ पसंदीदा भारतीय व्यक्तित्व (पुरुष)

1- नीलेश मिश्रा
2- सतीश शाह
3- कपिल देव
मेरे कुछ पसंदीदा भारतीय व्यक्तित्व (महिलाए)

1- अनुराधा पौडवाल
2- राधिका मदान
3- राजश्री
मेरे कुछ पसंदीदा अन्तर्राष्ट्रीय व्यक्तित्व (पुरुष)

1- इयान बाॅथम (Ian Botham)
2- मार्गन फ्रीमेन (Morgan Freeman)
3- निक्की लुडा और जेम्स हण्ट (Nicki Lauda and James Hunt)
मेरे कुछ पसंदीदा अन्तर्राष्ट्रीय व्यक्तित्व (महिलाए)

1- Princess Diana
2- Vivien Leigh
3- Carole Bouquet
...और अंत में यह खाली पेराग्राफ आप अपनी मर्जी से जो भी कहना चाहें लिखें।
"खुद से कोई वादा कर, पूरा ना सही आधा कर,
जीने का इरादा कर, थोड़ा नहीं ज़्यादा कर।
बढ़ा दे कदम मंज़िल की ओर,
रैन को चीर के दिख जाएगी भोर।"
-शंकर सहाय
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संपर्क व पुस्तक की खरीद संबंधित जानकारी
यदि कोई आप की लिखी किताब चन्दौसी जंक्शन खरीदना चाहे तो वह कहाँ उपलब्ध है?
वैसे तो चन्दौसी जंक्शन Notion Press, Amazon, Flipkart, दिल्ली की Variety Book Depot, चंडीगढ़ की Browser Library and Bookstore, Kindle और कई और जगह पर उपलब्ध है, लेकिन यदि कोई Author-signed copy में दिलचस्पी रखता है तो वह मुझे मेरे email id shankarsahay7@gmail.com पर सम्पर्क कर सकते हैं।
अगर आप ट्विटर पर है तो शंकर सहाय जी से कनेक्ट कर सकते हैं यह रहा उनका ट्विटर हैण्डिल:
@ShankarSahay7





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