बेवर में पारम्परिक चिकित्सा के संरक्षक वैद्य पं. राजेंद्र शर्मा
- vision5design

- Dec 21, 2021
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Updated: Jan 27, 2022

बेवर के वैद्य राजेंद्र शर्मा जी ने पारम्परिक आयुर्वेद या लोक चिकित्सा पध्दति को आधुनिक समय के बदलते स्वरूप में लोक सेवा में सतत प्रयुक्त किया है और इस तेजी से बदलते समय में पीढ़ियों से चली आ रही बेवर की वैद्य परम्परा को संचित रखा है।
आखिर यह पारम्परिक या लोक पध्दति क्या है?
विकिपीडिया के अनुसार:
"पारम्परिक चिकित्सा (traditional medicine) या लोक चिकित्सा (folk medicine) कई मानव पीढ़ीयों द्वारा विकसित वे ज्ञान प्रणालियाँ होती हैं जिनके प्रयोग से आधुनिक चिकित्सा प्रणाली से भिन्न तरीके से शारीरिक व मानसिक रोगों की पहचान, रोकथाम, निवारण और इलाज करा जाता रहा है।"
- विकिपीडिया
राजेन्द्र जी वैद्य श्रीरामशास्त्री जी के परिवार से आते हैं जो कि वैद्य स्व. सूबेदार आर्या जी के समकालीन थे। अपनी चिकित्सकीय पारिवारिक पृष्ठभूमि के अलावा राजेंद्र शर्मा जी ने साठ- सत्तर के दशक में गुरूकुल काँगड़ी विश्वविद्यालय, हरिद्वार से आयुर्वेदिक ज्ञान मे आयुर्वेद रत्न की उपाधि भी अर्जित की साथ ही आयुर्वेद चिकित्सा पध्दति में पारे यानि कि Mercury के प्रयोग में विशेष रूचि के चलते पारद शोध संस्थान दिल्ली से जुड़े रहे।

अपनी बुज़ुर्ग अवस्था में भी काफी सक्रिय रूप से सेवा से जुड़े हैं। अब वे अपने जी टी रोड पश्चिम स्थित आवास से ही रोगियों को देखते हैं व अपने पारिवारिक प्रतिष्ठान शिखा आयुर्वेदिक स्टोर के माध्यम से आयुर्वेदिक दवाये मुहैय्या करवाने का कार्य कर रहे हैं।
तो बेवर में आयुर्वेदिक चिकित्सा और वैद्य परम्परा चलती आ रही है और हम आशा करते हैं कि वर्तमान पीढ़ी के लोग इस बहुमूल्य ज्ञान को अपनाकर आगे बढाने का कार्य करेंगे।
पोट्रेट फोटो व संदर्भ: जीतेन्द्र प्रताप सिंह
अन्य फोटोज़ व लोगो: गूगल तथा कालेज दुनिया




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