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नदी वाले पीर बाबा, जलेसर

Updated: Mar 1, 2021

जलेसर अपनी पुरानी धरोहरो और विभिन्न दरगाहों व जात (यानि कि वार्षिक मेला या समारोह) के लिए भी जाना जाता है।

विभिन्न समुदायों के विभिन्न प्राचीन मान्य सिध्द स्थान जलेसर तहसील में पड़ते हैं। इन्हीं में से एक हैं "नदी वाले पीर बाबा" लोग यहां मन्नत मांगने आते हैं और मानना है कि प्राकृतिक रूप से लोगों की कामनाएँ पूर्ण हुईं हैं।


नदी वाले पीर बाबा की दरगाह
नदी वाले पीर बाबा की दरगाह

इनका नाम क्या है और यह स्थान कितना पुराना है ठीक-ठीक बताना मुश्किल है। पर सभी मानने वाले लोग उन्हे नदी वाले बाबा कह कर पुकारते हैं। सलिल के अनुसार यह काफी पुराने सिध्द स्थानों में माना जाता है।


बरसाती नदी : यह इस समय एक तालाब सी लगती है पर मानसून में नदी बन जाती है।
बरसाती नदी : यह इस समय एक तालाब सी लगती है पर मानसून में नदी बन जाती है।

यह कभी काफी बीहड़ स्थल रहा होगा जो एक बरसाती नदी के किनारे घने जंगल सा हुआ करता होगा।


  • यह बरगद का पेड़ भी दीर्घकालीन जान पड़ता है
  • यह बरगद का पेड़ भी दीर्घकालीन जान पड़ता है


पुरानी दीवारें ककईया ईंटों से किलेनुमा शैली में बनी हैं जो इस स्थल के 150 सौ 200 वर्ष से स्थित होने के ओर इशारा करती हैं। यह बरगद का पेड़ भी दीर्घकालीन जान पड़ता है।


खेतों के सहारे नदी के किनारे किनारे मिट्टी  की सड़क
खेतों के सहारे नदी के किनारे किनारे मिट्टी की सड़क

जलेसर आगरा रोड से कटकर एक कच्ची सड़क से आप नदी वाले पीर बाबा की दरगाह जा सकते हैं।


पहले यह कच्ची सड़क भी नहीं हुआ करती थी, सलिल के अनुसार पीर बाबा को मानने वाले जलेसर के एक विधायक ने आगरा रोड से दरगाह तक पहुंचने का यह मार्ग प्रशासनिक तौर पर चालू करवाया।


आशा है, यह पोस्ट आपको जलेसर के बारे में कुछ नयी जानकारी देने में सफल हुई होगी। अगर कहीं कोई जानकारी अधूरी या कम रह गयी हो तो हमें जरूर बतायें हम तुरंत सुधार कर देंगें।


फोटोज़ व विवरण:

सलिल (जीतेन्द्र प्रताप सिंह)



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